Rakshabandhan: रक्षाबंधन भाई-बहन के प्यार का प्रतीक

Rakshabandhan: रक्षाबंधन भाई-बहन के प्यार का प्रतीक

प्रस्तावना:

हमारे संस्कृति में रिश्तों का महत्वपूर्ण स्थान है, और भारतीय समाज में भाई-बहन का रिश्ता अत्यधिक महत्व रखता है। इस विशेष पर्व ‘रक्षाबंधन’ के माध्यम से हम इस प्रेम और स्नेह का परिचय करेंगे, जो भाई और बहन के बीच साझा होता है।

पर्व का महत्व:

‘रक्षाबंधन’ शब्द संस्कृत में ‘रक्षा’ और ‘बंधन’ शब्दों से मिलकर बना है, जिनका अर्थ होता है ‘सुरक्षा की बंधने’। यह पर्व वर्षा ऋतु में आगामी श्रवण पूर्णिमा को मनाया जाता है और यह भाई-बहन के प्यार और सम्मान का प्रतीक माना जाता है।

पर्व की पौराणिक कथा:

हिन्दू मिथोलॉजी के अनुसार, देवी लक्ष्मी ने अपने भाई बलि को रक्षा के लिए बंधन बांधा था। इसी तरह, भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी के बीच भी एक रोचक कथा जुड़ी है, जिसमें द्रौपदी ने अपने आराध्य भगवान की आवश्यकता समझकर उन्हें अपनी साड़ी का कोना बांध दिया था। इस प्रकार, ‘रक्षाबंधन’ के पर्व में दी गई शिक्षाएँ आज भी हमें बंधनों की महत्वपूर्णता को सिखाती हैं।

पर्व की धाराओं और रस्मों का महत्व:

रक्षाबंधन के दिन, बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है, जिसे वे अपने भाई की सुरक्षा के प्रतीक के रूप में प्रेषित करती हैं। भाई भी इस आदर्श कार्य के प्रतिस्थान के रूप में बहन को विशेष उपहार देते हैं, जिससे उनके बीच का प्रेम और बंधन और भी मजबूत होता है।

समाज में रूपरेखा:

रक्षाबंधन एक ऐसा पर्व है जो भाई-बहन के बीच आपसी सम्मान, स्नेह, और समर्पण का परिचय कराता है। यह रिश्ता उनकी संगठनात्मक क्षमताओं, प्रेम, और आपसी सहायता की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है।

निष्कर्ष:

‘रक्षाबंधन’ का यह पर्व हमें यह सिखाता है कि रिश्तों का महत्व केवल बातों में नहीं होता, बल्कि वास्तविकता में भी होता है। भाई-बहन के प्यार और सम्मान की एक अद्भुत मिसाल ‘रक्षाबंधन’ है, जो हमें रिश्तों के महत्व को समझने में मदद करता है।

इस रक्षाबंधन, हम सभी को यह दृढ़ संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने भाई-बहन के प्रति प्यार और सम्मान को हमेशा बनाए रखें, और उनके बीच का यह अनूठा बंधन कभी भी कमजोर नहीं होने दें।

रक्षाबंधन: भाई-बहन के प्यार का प्रतीक

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