Pinocchio की पूरी कहानी हिंदी में

Pinocchio की पूरी कहानी हिंदी में

बहुत समय पहले, एक गरीब लकड़ी कारीगर एक लकड़ी की तुकड़ी से एक लकड़ी के टुकड़े बनाते थे। एक दिन, जब उन्होंने लकड़ी को काटकर देखा, उन्हें अचानक विचार आया कि क्या यदि यह टुकड़ा कुछ विशेष होता। वे सोचने लगे कि उन्हें एक विशेष गोले बनाना चाहिए, जो अद्भुत और जीवित हो सकता है। इसलिए उन्होंने एक वृक्ष से एक खास टुकड़ा काटा और उसे वर्कशॉप में रखा।

उन्होंने अपनी मेज़बानी की और अपने मित्रों के साथ अपनी कठिनाइयों और समस्याओं के बारे में बात की। उन्होंने टुकड़े को एक गोले में बदलने की कोशिश की, लेकिन वह असफल रही। उन्होंने अधिक शक्तिशाली और स्थिर लकड़ी की तलाश की और एक वृक्ष से एक और टुकड़ा प्राप्त किया।

यह बारीक लकड़ी कारीगर के दिल में एक आदर्श बालक की आकांक्षा को जगाती थी। वे सोचते थे कि यदि वे उसे अपनी पूरी मेहनत और कला से बना सकते हैं, तो यह बच्चा वास्तविक हो सकता है। उन्होंने पूरी निष्ठा और मेहनत से टुकड़े को एक बच्चे की तरह ढाला। उसे विचारशीलता, भक्ति और नीतियों का अद्ययन करने के लिए सभी सच्चाईयों को देने की आवश्यकता होती थी।

बस तभी उनकी एक बड़ी आंखों वाली मित्रिण एक जादूगर द्वारा उनके पास आई और वह उन्हें बताया कि वह उनके सपनों को साकार करने में सहायता करने के लिए आ रहा है। उसने टुकड़े को देखकर उन्हें बताया कि वह अपने सपनों को पूरा करने के लिए उन्हें जीवित बना सकता है। लकड़ी कारीगर ने खुशी से अपने मित्रिण के वचनों पर विश्वास किया और उसे यह करने की अनुमति दी।

जादूगर ने एक जादू का तंत्र चलाया और टुकड़ा एक जीवित और बोलने वाले बच्चे में बदल गया। लकड़ी कारीगर बहुत खुश थे, लेकिन उन्होंने जादूगर से यही कहा कि वह अपने नए दोस्त को उचित और ईमानदार बनाने के लिए उसे बहुत कुछ सिखाएं।

बच्चे ने खुशी और उत्साह के साथ अपने पिताजी को गले लगाया, लेकिन बहुत जल्दी वह नकली दोस्त बन गया। उसकी ईमानदारी कमज़ोर हो गई और वह झूल, खेलने और मस्ती करने के लिए बहुत आलसी बन गया। उसने अपने पिताजी की बात नहीं मानी और गलत लोगों के साथ घूमने चला गया।

अपनी भूल से, बच्चे अब भयानक घोड़े और बर्डकेट नामक जादूगर के बस में फंस गये। इन अजनबी और भयानक लोगों ने बच्चे को अच्छी तरह से बर्बाद किया और उसे एक अन्य जादू का शिकार बना दिया। इन घोड़ों के जादू से पिनोकियो को अच्छी तरह से सजा दी गई।

पिनोकियो को अपनी बुराईयों की पहचान हुई और उसे यह अनुभव हुआ कि ईमानदारी, सच्चाई और अच्छाई का महत्व है। वह अपनी गलती से सीखा और एक बेहतर व्यक्ति बनने का संकल्प लिया।

पिनोकियो अपने पिताजी के पास लौटा, जहां उन्होंने अपनी गलतियों को स्वीकार किया और अपने नए संकल्प का बयान किया। उनके पिताजी गर्व से भरे हुए थे और उन्होंने उन्हें अपने आदर्श बालक के रूप में स्वीकार किया। अब पिनोकियो एक सच्चा और ईमानदार बच्चा था, जिसने अपने पिताजी को गर्व महसूस कराया।

यह दिखाता है कि ईमानदारी, सच्चाई और अच्छाई हमेशा जीवन में महत्वपूर्ण होती हैं, और अगर हम इनका पालन करते हैं तो हम सच्चे और खुशहाल जीवन जी सकते हैं।

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